दुनिया भले ही चांद पर पहुंच जाए लेकिन हमारी परंपराएं और रीति रिवाज़ आज भी उतने ही जीवन्त है जितने पहले हुआ करते थे। विज्ञान ने आज भले ही कितनी भी तरक्की कर ली हो लेकिन अब भी वो कई सवालों के जवाब देने में असमर्थ हैl वैसे तो सभी जगहों के अलग-अलग रीति रिवाज होते हैl जिनमें कई जगहों पर उसी के ये रिवाज मजाक बन जाते हैl
इन्ही अजीबो-गरीब रिवाज के मामले में जब आप हिमाचल के पीणी गांव के बारे में जानेंगे तो आप दंग रह जाएंगेl हिमाचल प्रदेश की मणिकर्ण घाटी में स्थित पीणी गांव आज भी सदियों पुरानी कई परंपराओं को निभाता चला आ रहा हैl यहां के लोगों के साथ-साथ, यहां की परंपराएं भी काफी अनोखी है जिनमें इनका पूरा-पूरा विश्वास हैl तो आज हम आपको यहाँ की ऐसी ही एक अजीब लेकिन बेहद शर्मनाक परंपरा के बारे में बताएँगेl
एक इंसान की ज़िन्दगी का सबसे अहम हिस्सा होता है शादीl शादी के बाद पति-पत्नि में हंसी-मजाक, नोंक-झोंक चलना जैसे आम हैl लेकिन हिमाचल के इस गाँव में मामला कुछ उल्टा हैl यहां पर साल के पांच दिन तक पति-पत्नि एक दूसरे से हंसी मजाक नहीं कर सकतेl उन्हें एक दूसरे से बिलकुल अंजान बनकर रहना होता हैl
इस गांव में महिलाओं के लिए एक ऐसी परंपरा भी है जिसे निभाना हर किसी के बसकी बात नहीं हैl यहाँ कि परंपरा के अनुसार इस गांव की महिलाएं साल के पांच दिन तक कपड़े ही नहीं पहनती हैं और वो पूरी तरह निर्वस्त्र होकर करती है कुछ ऐसा जो आप सपने में भी नहीं सोच सकतेl इसके संदर्भ में माना जाता है कि अगर कोई महिला इसका निवर्हन न करे तो उसके घर कुछ अशुभ हो जाता है।
शराब पीना वैसे बुरी बात है और आज कल सरकार इस पर काफी हद तक लगाम भी कसती दिख रही हैl लेकिन कुछ लोग दुनिया में ऐसे भी होते है जिनका शराब के बिना गुजारा होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है और अगर आप पीणी गांव में हैं तो फिर यहां पांच दिन के लिए जहाँ महिलाओं का निर्वस्त्र होना अनिवार्य होता है तो वहीँ किसी को भी इन दिनों शराब पीने क्या सूंघने को भी नहीं मिलतीl यहां लोग पांच दिनों तक शराब का सेवन नहीं करते!
इन अजीब-गरीब परंपराओं को पढ़कर आपके दिमाग में एक प्रशन जरीर आया होगा कि ये ऐसा क्यों करते है और ये कौन से पांच दिन हैं? तो आपको बता दें कि ये पांच दिन 17 से 21
अगस्त के है जिसे काला महीना भी कहा जाता हैl इन दिनों लोग शराब का सेवन नहीं करते है और इस तरह निर्वस्त्र रहकर अजीब चीज़ें करते हैंl यहां के लोगों का मानना है कि लाहुआ घोंड देवता जब पीणी पहुंचे थे तो उस दिन राक्षसों का आतंक थाl भादो संक्रांति को यहां काला महीना कहा जाता हैl इस दिन देवता ने पीणी में पांव रखते ही राक्षसों का विनाश किया थाl कहा जाता है कि इसके बाद से ही ये परंपरा शुरू हुई थी, जो आज भी कायम हैl

