कुल्लू (Himachal) हालांकि इजरायल एक अलग देश है लेकिन भारत में भी एक मिनी इजरायल बसता है, जो पूरी दुनिया में नशे खासकर चरस के लिये बदनाम है और वहां पर विश्व भर में पाये जाने वाले तमाम नशीले पदार्थ आसानी से मुहैया हो जाते हैं। यही नहीं बल्कि वहां पर कुछ ऐसे रेस्तरां भी है जहां भारतीयों को प्रवेश नहीं मिलता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला की पार्वती घाटी में स्थित कसोल की।
कसोल पूरी दुनिया में मिनी इजरायल के नाम से मशहूर है। इसके साथ ही बेहतर क्वालिटी की चरस के लिये भी इसकी पहचान दुनिया भर में है। इंटरनेट पर कसोल टाइप करते ही कसोल की प्रसिद्धी का खजाना खुल जाता है। उल्लेखनीय है कि पार्वती घाटी में स्थित कसोल हालांकि पूर्व में प्राकृतिक सौंदर्य के लिये विश्व भर में विख्यात था और यहां पर सैलानी प्राकृतिक साैंदर्य का खूब आनंद उठाया करते थे हालांकि प्रकृति प्रेमी आज भी कसोल आते हैं लेकिन आज कसोल आने के मायने बदल गये हैं। आज कसोल प्राकृतिक सौंदर्य के बजाय चरस व अन्य नशीले पदार्थों के लिये ज्यादा जाना जाता है।
कसोल को यह नई पहचान इजरायली सैलानियों ने दी। माना जाता है विदेशी सैलानियों में इजरायलियों ने यहां पर सबसे पहले दस्तक दी और जैसे-जैसे उनको चरस पीने में आनंद आने लगा वैसे वैसे कसोल में इजरायलियों की तादाद भी बढती गई और आज स्थिति यह है कि कसोल को आज दुनिया भर में उसके असली नाम कम और मिनी इजरायल के नाम से ज्यादा जाना जाता है। चरस की वजह से बना मिनी इजरायल हालांकि यहां पर चरस का प्रचलन पुरातन काल से ही था लेकिन इतने बडे स्तर पर नहीं था। मगर जैसे ही इजरायलियों की नजर यहां पडी वैसे ही कसोल अंतरराष्ट्रीय माफिया व नशे के सौदागरों का अड्डा बना गया है।
भले ही विदेशी सैलानी आने से यहां के लोगों की आर्थिकी में भारी बदलाव आया है और बेरोजगारों को रोजगार के अवसर भी मिले हैं लेकिन एक हकीकत यह भी है कि विदेशियों की संगत में खास कर युवा पीढी पूरी तरह से अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है और यह भी हकीकत है कि कसोल में हर कहीं चरस से लेकर हैरोईन, स्मैक, एलएसडी, अफीम, गांजा, हशीश व ब्राड्डन शुगर आदि तमाम नशीले पदार्थ बडी आसानी से मुहैया हो जाते हैं। यही वजह है कि कसोल में विदेशी सैलानी खासकर इजरायली महिनों डेरा डाले रहते हैं। कुछ स्थानीय लोग बडे स्तर पर इसी धंधे में लगे हुये हैं।
कुछ रेस्तरा में भारतीयों के प्रवेश पर पाबंदी
कसोल में कुछ ऐसे रेस्तरां भी हैं जहां भारतीयों के प्रवेश पर पाबंदी है। हालांकि कुछ अरसा पहले यह मामला मीडिया में आने के बाद से इन रेस्तरां के बाहर लगे इंडियन आर नॉट अलाउड के बोर्ड तो हटा दिये गये हैं लेकिन स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है। जानकारी के अनुसार हालांकि अब भारतीय सैलानियों इनमें जाने से तो नहीं रोका जाता है लेकिन उनसे न तो किसी चीज का आर्डर लिया जाता है और न ही उनको किसी चीज के लिये पूछा जाता है। ऐसे में वह स्वंय ही उपेक्षित हो कर वहां से बाहर निकल जाते हैं। जानकारी के अनुसार दो या तीन ऐसे रेस्तरां हैं जहां पर भारतीयों के प्रवेश पर अघोषित पाबंदी है।
कसोल पूरी दुनिया में मिनी इजरायल के नाम से मशहूर है। इसके साथ ही बेहतर क्वालिटी की चरस के लिये भी इसकी पहचान दुनिया भर में है। इंटरनेट पर कसोल टाइप करते ही कसोल की प्रसिद्धी का खजाना खुल जाता है। उल्लेखनीय है कि पार्वती घाटी में स्थित कसोल हालांकि पूर्व में प्राकृतिक सौंदर्य के लिये विश्व भर में विख्यात था और यहां पर सैलानी प्राकृतिक साैंदर्य का खूब आनंद उठाया करते थे हालांकि प्रकृति प्रेमी आज भी कसोल आते हैं लेकिन आज कसोल आने के मायने बदल गये हैं। आज कसोल प्राकृतिक सौंदर्य के बजाय चरस व अन्य नशीले पदार्थों के लिये ज्यादा जाना जाता है।
कसोल को यह नई पहचान इजरायली सैलानियों ने दी। माना जाता है विदेशी सैलानियों में इजरायलियों ने यहां पर सबसे पहले दस्तक दी और जैसे-जैसे उनको चरस पीने में आनंद आने लगा वैसे वैसे कसोल में इजरायलियों की तादाद भी बढती गई और आज स्थिति यह है कि कसोल को आज दुनिया भर में उसके असली नाम कम और मिनी इजरायल के नाम से ज्यादा जाना जाता है। चरस की वजह से बना मिनी इजरायल हालांकि यहां पर चरस का प्रचलन पुरातन काल से ही था लेकिन इतने बडे स्तर पर नहीं था। मगर जैसे ही इजरायलियों की नजर यहां पडी वैसे ही कसोल अंतरराष्ट्रीय माफिया व नशे के सौदागरों का अड्डा बना गया है।
भले ही विदेशी सैलानी आने से यहां के लोगों की आर्थिकी में भारी बदलाव आया है और बेरोजगारों को रोजगार के अवसर भी मिले हैं लेकिन एक हकीकत यह भी है कि विदेशियों की संगत में खास कर युवा पीढी पूरी तरह से अपनी संस्कृति से दूर होती जा रही है और यह भी हकीकत है कि कसोल में हर कहीं चरस से लेकर हैरोईन, स्मैक, एलएसडी, अफीम, गांजा, हशीश व ब्राड्डन शुगर आदि तमाम नशीले पदार्थ बडी आसानी से मुहैया हो जाते हैं। यही वजह है कि कसोल में विदेशी सैलानी खासकर इजरायली महिनों डेरा डाले रहते हैं। कुछ स्थानीय लोग बडे स्तर पर इसी धंधे में लगे हुये हैं।
कुछ रेस्तरा में भारतीयों के प्रवेश पर पाबंदी
कसोल में कुछ ऐसे रेस्तरां भी हैं जहां भारतीयों के प्रवेश पर पाबंदी है। हालांकि कुछ अरसा पहले यह मामला मीडिया में आने के बाद से इन रेस्तरां के बाहर लगे इंडियन आर नॉट अलाउड के बोर्ड तो हटा दिये गये हैं लेकिन स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है। जानकारी के अनुसार हालांकि अब भारतीय सैलानियों इनमें जाने से तो नहीं रोका जाता है लेकिन उनसे न तो किसी चीज का आर्डर लिया जाता है और न ही उनको किसी चीज के लिये पूछा जाता है। ऐसे में वह स्वंय ही उपेक्षित हो कर वहां से बाहर निकल जाते हैं। जानकारी के अनुसार दो या तीन ऐसे रेस्तरां हैं जहां पर भारतीयों के प्रवेश पर अघोषित पाबंदी है।
