हमेशा की तरह एक बार फिर से दिल्ली के बदनाम जीबी रोड के एक कोठे पर छापा पड़ा और ये वही एरिया है जहां कई सारी लड़कियां मौजूद थी लेकिन छापा पड़ते ही वो कई सभी अपने चेहरे को अपने दुपट्टों से ढ़क लिया था। रेड पड़ने के ठीक अगली सुबह फिर से वही सब शुरू हो जाता है फिर से उस कोठे पर कई नई ज़िन्दगी तबाह होने आती है और फिर से लड़कियां ग्राहकों को आवाज़ देने लगती हैं। इनके चेहरों जो देखने से ही पता चलते हैं कि भड़कीला मेकअप किया होता है।
कहते हैं कि ये अपने दर्द को छिपाने के लिए ऐसा करती है लेकिन सच क्या है ये कोई नहीं जानता। अब यही उनका घर होता है और वहीं अपने-अपने बर्बाद हो चुके परिवार के साथ रहती हैं। वैसे तो सभी कोठों पर लड़कियों को बहला फुसलाकर लाया जाता है और उसके बाद उसे अपने शरीर बेचने को मजबूर किया जाता है और विरोध करने पर उसे प्रताडि़त भी किया जाता है।
यहां से वे कभी बाहर नहीं निकलना संभव नहीं हो पाता लेकिन उसके बावजूद कुछ ऐसी लड़कियां हैं जो कभी-कभी बाहर निकल जाती हैं जिसे चमत्कार ही कहा जाता है। आज भी हम एक ऐसी लड़की की कहानी लेकर अाए हैं तो आइए जानते हैं इस लड़की की कहानी को। कोठे पर उसे शिल्पा कहते थे लेकिन उसका असली नाम कुछ और ही था। शिल्पा को अच्छी नौकरी का लालच देकर दिल्ली लाया गया था, लेकिन उसे बेच दिया गया एक कोठे पर, जहां शुरू हुई उसकी दर्दनाक दास्तान…
शिल्पा ने बताया, “तीन दिन तक वो रोती रही उसने बार बार कहा वो ये काम नहीं कर सकती, जिसके बदले उसे रोज़-रोज़ मारते थे। उसके बाद उससे जबरन कुबुल करवाया गया कि वो यहां अपनी मर्जी से आई है कमाना था… पांव पर खड़े होना था… मेरी मर्ज़ी से मैं काम करने आई हूं…”जिसे मोबाइल फोन पर रिकॉर्डिंग करा गया। शिल्पा ने बताया कि वहां लड़कियों को छोटे-छोटे कपड़े पहनाते हैं… वहां पर अच्छी तरह तैयार करवाते हैं। मेरे साथ भी वहां वैसा ही किया गया।
बहुत
सारी छोटी-छोटी लड़कियां भी हैं वहां पर जिनमें से 75 प्रतिशत धोखे से लाई गई हैं। बाकी अपनी मर्ज़ी से आई हैं। शिल्पा को कई दिन तक मारपीट से, जबरदस्ती के बाद से शिल्पा भी देश के दूसरे कोनों से आई लड़कियों की तरह टूट गई, और सेक्सवर्कर के तौर पर काम करने को मजबूर हो गई ।
लेकिन ऐसा ज्यादा दिन नहीं चला एक दिन किस्मत ने उसका साथ दिया और उसका एक ग्राहक उसकी कहानी सुनकर मदद के लिए राजी हो गया। शिल्पा ने बताया, “वह कस्टमर थे उनका चेहरा देखकर लगा कि वह अच्छे इंसान हैं। थोड़ा देखा, बात की तो अच्छे लगे। मैंने उन्हें सब बता दिया। जिसके बाद उस कस्टमर ने उसके भाई से उसकी बात करवा दी शिल्पा ने अपने बारे में सबकुछ अपने भाई को बता दिया तभी उसका भाई कर्नाटक पुलिस के पास पहुंचा और वहां से एक पुलिस टीम के साथ दिल्ली आया।
स्थानीय पुलिस से संपर्क किया गया और छापा मारा गया लेकिन जब छापा पड़ा, शिल्पा वहां से लापता हो चुकी थी क्योंकि कोठा मालिकों को रेड की खबर मिल चुकी थी। शिल्पा ने बताया कि उन लोगों को पुलिस के आने की सूचना आधे घंटे पहले ही मालूम पड़ जाती थी, लेकिन ये कैसे होता था ये नहीं पता यही कारण था कि ये लोग लड़कियों को सूट पहनाकर बाहर भेज देते थे। या फिर एक छोटी-सी जगह पर 20-30 लड़कियों को बंद कर देते थे। ”
शिल्पा ने बताया कि वहां छोटे-छोटे रूम है जिसमें छोटी-छोटी खिड़कियां पुलिस के आने पर वो लोग उन्हें वहीं छिपाते थे उसमें कुछ नहीं है… हवा तक नहीं था सिर्फ अंधेरा। लड़कियां वहां पर मर भी जाती थी। शिल्पा ने तो ये भी कहा कि वो ये बात गारंटी से बोल सकती है कि लोकल पुलिस मिली हुई है।लेकिन उस समय शिल्पा के न मिलने पर उसके भाई ने हार नहीं मानीउसने कोठा नंबर 42 पर फिर दो आदमी भेजे, जो इस बार मोबाइल फोन से शिल्पा की तस्वीर खींचने में कामयाब रहे, जो इस बात का सबूत था कि शिल्पा अब भी उस कोठे पर मौजूद है।
लोकल पुलिस से शिल्पा के भाई को मदद नहीं मिल पा रही थी तभी शिल्पा के भाई ने मीडिया से मदद मांगी, और फिर हमने बात की क्राइम ब्रांच के एडिशनल कमिश्नर रवींद्र यादव से जिन्होंने बताया कि ऐसे बहुत सारे केस होते हैं, जिनमें लड़कियां बाहर से लाई जाती हैं और उन्होंने दावा किया कि पुलिस ऐसे मामलों में फौरन कार्रवाई भी करते हैं।
एक बार
फिर से छापेमारी की गई लेकिन
इस बार भी कोठे
की मालकिन को रेड
की ख़बर मिल गई,
और लगभग 15 लड़कियों के साथ
शिल्पा को सीताराम बाजार
के एक ब्यूटी पार्लर में भेज दिया
गया, जो उसके लिए
बहुत ही सही साबित
हुआ और वो वहां
से भाग निकली। आज शिल्पा आजाद
तो है लेकिन वो चाहती
है कि इन कोठों
पर रहने वाली उसके
जैसी सैकड़ों लड़कियों को भी आज़ादी मिल जाए।
