Saturday, July 1, 2017

IPL स्टार जो करोड़ों में बिका, डीयू में दाखिले के लिए लाइन में खड़ा है

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन शुरू हो गए हैंखबर है कि डीयू की 5 फीसदी सीटें जो स्पोर्ट्स कोटा के लिए रखी जाती हैं, के लिए करीब 13000 खिलाड़ियों ने अप्लाई किया है. इनके ट्रायल्स के आधार पर एडमिशन होंगे. मगर इन सबके बीच एक नाम जो खबरों में आया है, वो है पवन नेगी का. 24 साल के नेगी पिछले साल इंडिया की T20 टीम में शामिल हुए और इसी IPL सीजन में  रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर में भी खेले. नेगी को RCB ने 1 करोड़ में खरीदा था. वहीं 2016 में नेगी को 8.5 करोड़ में खरीदा गया था.  IPL के इस सीजन में नेगी ने 10 मैचों में 14 विकेट लीं थी. पवन नेगी ने भी स्पोर्ट्स कोटा के तहत दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अप्लाई किया था मगर जिन 10 लोगों को सीथे एडमिशन के लिए चुना गया है, उसमें इस खिलाड़ी का नाम नहीं है.

डीयू ने बताया है कि नेगी के एप्लीकेशन फॉर्म के साथ जो डॉक्युमेंट लगाया गया है वो विजय हजारे ट्रॉफी खेलने का है. ये टूर्नोमेंट नेशनल लेवल का क्रिकेट इवेंट है इसलिए नेगी को उन 10 लोगों में जगह नहीं मिली है जिन्हें डायरेक्ट एडमिशन दिया जाता है.और इस कारण उन्हें दूसरे एप्लीकेंट्स की तरह ट्रायल्स में शामिल होना होगा. मगर इससे भी दिलचस्प बात ये कि  जिन 10 लोगों को डायरेक्ट एडमिशन के लिए चुना गया है उनमें 8 शूटर हैं. एक जेवलिन थ्रोअर और एक तैराक.  दिल्ली यूनिवर्सिटी में 10 लोगों को बिना किसी ट्रायल या टेस्ट के एडमिशन का प्रावधान है. ये उन लोगों के लिए है जो देश के लिए ओलंपिक गेम्स, वर्ल्ड चैंपियनशिप, वर्ल्ड कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स, पैरालिम्पिक गेम्स आदि स्पोर्ट्स इवेंट्स में शामिल हो चुके होते हैं.

मगर इस बीच ध्यान देने की बात यह है कि आखिर क्या कारण है कि इन 10 लोगों में एक भी क्रिकेटर नहीं. अगर पवन नेगी को गिन भी लिया जाए तो भी क्या हजारों अकैडमियों में जो लाखों क्रिकेटर्स ट्रेन हो रहे हैं वे आगे पढ़ाई जारी नहीं रखना चाहते. या फिर क्रिकेटर बनना ही अपने आप में पूरी क्वालिफिकेशन मान ली गई है. एक नजर अपनी टीम इंडिया के खिलाड़ियों की पढ़ाई पर डाली जाए तो पता चलता है कि क्रिकेट में सफल होने से इस देश में सब कुछ मिल जाता है. सचिन 12वीं पास हैं. सहवाग ने जामिया से ग्रेजुएशन डिग्री ली है. शिखर धवन, युवराज सिंह और विराट कोहली के पास महज 12वीं पास का सर्टिफिकेट है. इसमें कोई दिक्कत की बात नहीं है अगर खिलाड़ी को अपनी खेल में सक्सेस मिल रही है. मगर क्रिकेट ही इसका इकलौता उदाहरण दिखता है.

ये सच्चाई है कि देश में क्रिकेट के अलावा दूसरी खेलों के खिलाड़ी अपनी पढ़ाई को साथ में लेकर चलते हैं. कारण एक ही है कि वे खुद को एक अदद सरकारी नौकरी के लिए तैयार कर रहे होते हैं. इंटरनेशनल लेवल पर खेलकर भी वे सरकारी दफतरों और अफसरों के केविन के बाहर इंतजार करते दिखते हैं. इन 10 लोगों में क्रिकेट खेलने वालों का नाम नहीं होना अपने आप में गैर-क्रिकेट वालों पर एक प्रेशर क्रिएट जरूर करता है. साथ ही ये हर किसी को क्रिकेट ही खेलने की ओर भी मोटिवेट करता है. टैलंट की अनेकता जरूरी है.

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